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प्रभु की यह कैसी माया ?

प्रभु की यह कैसी माया ? अब मुझे ठीक से अहसास हो चला है कि भारतीय रेल के लिए चाहे जितने जतन किये जाएँ , सुधर नहीं सकती !!! प्रभु जी से ...
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फिर भी यथार्थबोध नहीं

फिर भी यथार्थबोध नहीं  बितरसम मन अज़ किरद गाहे जहाँ , कि दानद हमीं आशकारो निहाँ | - फ़ारसी कवि फ़िरदौस तूसी अर्थात , हे ईश्वर , तू मेर...
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